गुजरात सरकार द्वारा फ्लिपकार्ट के साथ हुए समझौते पर व्यापारी आग बबूला

नोएडा


कन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्ज़ (कैट) ने गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी पर हमला बोलते हुए कहा की गुजरात राज्य हथकरघा और हस्तशिल्प विकास सहयोग लिमिटेड (जीएसएचएचडीसी) और ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस इकाई फ्लिपकार्ट के बीच कारीगरों के साथ फ्लिपकार्ट को जोड़ने का निर्णय बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है । एक तरफ़ तो भारतीय कानूनों के उल्लंघन और एफडीआई नियमों के उल्लंघन के लिए भारत के प्रतिस्पर्धा आयोग द्वारा इस कम्पनी के ख़िलाफ़ जाँच शुरू की गई है वहीं दूसरी ओर गुजरात सरकार इसी कम्पनी के साथ करार किया जा रहा है ।


कैट के राष्ट्रीय महामंत्री श्री  प्रवीन खंडेलवाल ने कहा- यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और खेदजनक है कि एक तरफ केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ मंत्री श्री पीयूष गोयल ने सार्वजनिक रूप से फ्लिपकार्ट पर किए जा रहे अनैतिक और गैरकानूनी व्यापार प्रथाओं के लिए अपनी चिंता व्यक्त की है और दूसरी ओर मुख्यमंत्री रूपानी ने फ्लिपकार्ट के साथ हाथ मिलाया है। उन्होंने कहा, श्री रूपानी के इस फैसले से न केवल केंद्र सरकार के रुख के साथ विरोधाभास और टकराव होता है, बल्कि इससे भारत के उन 7 करोड़ व्यापारियों की भावनाएं भी आहत होती हैं, जिनकी जीविका फ्लिपकार्ट के  व्यापार मॉडल के कारण बुरी तरह प्रभावित हो रही है। श्री खंडेलवाल ने आगे कहा कि गुजरात के सीएम द्वारा की गई यह कार्रवाई गुजरात के छोटे खुदरा विक्रेताओं के प्रति उनकी असंवेदनशीलता और उदासीनता को भी दर्शाता है जो फ्लिपकार्ट के बिजनेस मॉडल के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन में शामिल हैं।


श्री बीसी भरतिया कैट  के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने गुजरात के मुख्यमंत्री से इस फैसले पर तुरंत पुनर्विचार करने और फ्लिपकार्ट के साथ इस तरह के किसी भी सहयोग को वापस लेने का आग्रह किया क्योंकि यह सरकार के दृष्टिकोण के बारे में नकारात्मक प्रभाव डालता है। उन्होंने पूछा, “सरकार कानून उल्लंघन करने वालों के साथ कैसे सहयोग कर सकती है? “यह गुजरात सरकार द्वारा एक निंदनीय कार्रवाई है और सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाती है।


कैट पिछले 5 महीनों में फ्लिपकार्ट और अमेज़ॅन जैसे मार्केटप्लेस के खिलाफ एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन का नेतृत्व कर रहा है और पूरे राष्ट्र के ध्यान में लाया है की अमेज़ॅन और फ्लिपकार्ट द्वारा विशेष गहरी छूट, लागत से भी कम मूल्य पर माल बेचना और लगातार किए जा रहे एफडीआई नीति के विभिन्न धमाकेदार उल्लंघन से रीटेल बाज़ार पूरी तरह ध्वस्त हो गया है । इन्वेंट्री कंट्रोल, तरजीही विक्रेता सिस्टम जो  एफडीआई कानूनों के तहत अनुमति नहीं है को फ्लिपकार्ट लगातार प्रोत्साहन दे रहा है ।


कैट ने कहा की उसके आंदोलन और साक्ष्य प्रस्तुत करने के बाद ही भारत के प्रतिस्पर्धा आयोग ने कार्रवाई की है जिसने प्रथम दृष्टया फ्लिपकार्ट के ख़िलाफ़  कानून का उल्लंघन पाया है।