मशहूर नृत्यांगना आनंदा शंकर जयंत की नृत्य प्रस्तुति 'टेल्स फ्रॉम बुल एंड टाइगर नृत्य प्रस्तुति कमानी आॅडिटोरियम में 16 दिसंबर की संध्या 7 बजे



    • नई दिल्ली: राज्यसभा सांसद और पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. सोनल मानसिंह तथा दिल्ली स्थित उनका सेंटर फॉर इंडियन क्लासिकल डांस (सीआईसीडी), जिसे श्री कामाख्या कलापीठ के नाम से जाना जाता है, मशहूर नृत्यांगना और कोरियोग्राफर आनंदा शंकर जयंत की चर्चित नृत्य प्रस्तुति 'टेल्स फ्रॉम द बुल एंड द टाइगर' को राजधानी के कमानी आॅडिटोरियम में 16 दिसंबर को पेश करेंगी।




 


यह कार्यक्रम शंकरानंद कलाक्षेत्र, हैदराबाद के सहयोग से शाम 7 बजे प्रस्तुत किया जाएगा।


'टेल्स फ्रॉम द बुल एंड द टाइगर' को दिलचस्प नृत्य प्रस्तुति के लिए सराहना मिली है जिसमें शानदार कोरियोग्राफी, कलात्मक कुशाग्रता और खूबसूरत नृत्य प्रस्तुति का सौंदर्य समाया हुआ है।


इस मौके पर बतौर सम्मानित अतिथि प्रसार भारती के चेयरमैन श्री सूर्यप्रकाश और भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के महानिदेशक श्री अखिलेश मिश्रा को आमंत्रित किया गया है।


 


पद्मश्री पुरस्कार, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित और टीईडी की प्रशंसनीय वक्ता आनंदा ने कहा, 'हमारी वर्षों की नृत्य प्रस्तुति में ईश्वर की ही अनुकंपा रही है कि मैं टेल्स फ्रॉम द बुल एंड द टाइगर जैसी सफल नृत्य प्रस्तुति कर पाई हूं।'


 


शंकरानंद कलाक्षेत्र के रंगपटल की शृंखला में सबसे नई और सफल 26वीं नृत्य प्रस्तुति में आनंदा के साथ बतौर मेहमान कलाकार बंगलूरू के बेहतरीन नर्तक मिथुन श्याम और 20 प्रतिभावान नृत्यांगनाओं का दल भी शामिल है। इसमें संगीत सतीराजू वेणुमाधव, वस्त्रसज्जा गणेश नल्लारी, प्रकाश ज्ञानदेव सिंह और डिजिटल डिजाइन गुंजन अष्टपुत्रे ने दिया है।


जाने—माने कला समीक्षक सुनील कोठारी ने इसे 'दिलचस्प प्रस्तुति' बताते हुए तारीफ की, 'टेल्स फ्रॉम द बुल एंड द टाइगर' इससे पहले चेन्नई, बंगलूरू और हैदराबाद में पेश हो चुकी है, जहां दर्शकों और आलोचकों ने करतलध्वनि से इसकी सराहना की। दिल्ली में प्रस्तुति के बाद अब अगले कुछ महीनों में इसे मुंबई और पुणे में पेश किया जाएगा।


 


प्रेरणादायी टीईडी वक्ता और कला उद्यमी तथा पद्मश्री एवं संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार विजेता इस बैले नृत्यांगना ने कहा, 'यह नृत्य प्रस्तुति वर्षों के श्रमसाध्य शोध और महीनों के कठिन रिहर्सल का परिणाम है और शंकरानंद कलाक्षेत्र की 40वीं वर्षगांठ के अवसर पर सालभर चलने वाले समारोह का हिस्सा है।'


 


इसमें दर्शकों को शानदार व्याख्या के जरिये ऐसी दिलचस्प कहानियां बताई जाएंगी, जो सदियों के ज्ञान, बुद्धिमत्ता, दर्शन, कविता और संगीत को जीवन में उतारने वाली होंगी।


 


अपने 40 साल के सफर में शंकरानंद कलाक्षेत्र प्रदर्शन कला के लिए एक श्रेष्ठ राष्ट्रीय संस्थान के तौर पर उभरा है, जो भारतीय कला को दुनियाभर के दर्शकों के बीच पहुंचा रहा है। इसकी कला का दायरा पौराणिक कथाओं, ऐतिहासिक संदर्भों, लैंगिक मुद्दों, कविता, कल्पना, दर्शन और हास्य—परिहास तक फैला हुआ है। साथ ही यह हैदराबाद में भरतनाट्यम की युवा प्रतिभाओं को भी प्रशिक्षित कर रहा है।


 


इसने अपनी तरह का पहला भरतनाट्यम प्रैक्टिस ऐप 'नाट्यारंभ' (www.natyarambha.com) बनाकर डिजिटल कला क्षेत्र में भी अग्रणी हो गया है, जिसे 2017 में शुरू किया गया था और अब पूरी दुनिया में इसका इस्तेमाल किया जा रहा है।