अनुप्रिया ने लोकसभा में ओबीसी वर्ग का कट ऑफ सामान्य वर्ग से ज्यादा का मामला उठाया

अनुप्रिया पटेल ने मांग की कि किसी भी परिस्थिति में यदि आरक्षित वर्ग का कैंडिडेट सामान्य वर्ग के समान या उससे अधिक नंबर पाता है तो ऐसे कैंडिडेट को अनारक्षित कोटे में नौकरी दी जाय


नई दिल्ली/लखनऊ 


पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं अपना दल (एस) की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने गुरुवार को लोकसभा में शून्य काल के दौरान सरकारी भर्तियों में ओबीसी वर्ग के अभ्यार्थियों का कट ऑफ सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों से ज्यादा का मामला उठाया। श्रीमती पटेल ने मांग की कि किसी भी परिस्थिति में यदि आरक्षित वर्ग का कैंडिडेट सामान्य वर्ग के समान या उससे अधिक नंबर पाता है तो ऐसे कैंडिडेट को अनारक्षित कोटे में नौकरी दी जाय। अगर ऐसा नहीं हुआ तो आरक्षित वर्ग संविधान प्रदत्त आरक्षण के अधिकार से वंचित होंगे।


श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने लोकसभा में अपनी बात रखते हुए कहा कि पिछले कुछ समय से उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, झारखंड, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों से लगातार ख़बरें आ रही हैं कि आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों का कट ऑफ सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों से ज़्यादा है। ऐसे रिजल्ट का मतलब ये है कि अगर आप रिजर्व कटेगरी की हैं तो सेलेक्ट होने के लिए आपको जनरल कटेगरी के कट ऑफ से ज्यादा नंबर लाने होंगे।


1 हाल ही में उत्तर प्रदेश के होम्योपैथी चिकित्सा अधिकारियों की नियुक्ति में सामान्य वर्ग का कटऑफ 86 तो ओबीसी कटेगरी का 99 फीसदी रहा।



  1. राजस्थान एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (आरएएस) परीक्षा, 2013 में ओबीसी कटेगरी का कट ऑफ 381 और जनरल कटेगरी का कट ऑफ 350 रहा।

  2. रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स के सब इंसपेक्टर के लिए बनी मेरिट लिस्ट में ओबीसी कटेगरी का कट ऑफ 95.53 प्रतिशत रहा जबकि इससे कम 94.59 परसेंट लाने वाले जनरल कटेगरी के कैंडिडेट सेलेक्ट हो गए।

  3. दिल्ली सरकार ने शिक्षकों की नियुक्ति के लिए एससी कैंडिडेट की कट ऑफ 85.45 परसेंट निर्धारित की गई, जबकि जनरल कटेगरी की कट ऑफ उससे काफी कम 80.96 परसेंट निर्धारित की गई।

  4. मध्य प्रदेश में टेक्सेसन असिस्टेंट की परीक्षा में भी ओबीसी का कट ऑफ जनरल से ऊपर चला गया। ऐसा कई राज्यों में हो रहा है।


चूंकि वैधानिक प्रावधान यह है कि आरक्षित वर्ग का कैंडिडेट अगर सामान्य वर्ग के कैंडिडेट से ज़्यादा नम्बर पता है, तो उसे अनारक्षित यानी जनरल सीट पर नौकरी दी जाएगी, न कि आरक्षित सीट पर। मगर ऐसा होता नहीं है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट के फैसले में कहा गया है कि आरक्षित वर्ग का कैंडिडेट उसी स्थिति में ज्यादा नंबर पाने पर अनारक्षित सीट पर नौकरी पा सकता है जब उसने किसी प्रकार की कोई छूट मतलब उम्र सीमा, अप्लाई के दौरान सामान्य वर्ग की तुलना में कम फीस नहीं दी हो। चूंकी आरक्षित वर्ग के लोग आर्थिक दृष्टि से अभी भी बहुत पीछे हैं और समान अवसर अब भी उनके लिये सपना है, ऐसे में इस वर्ग के कैंडिडेट का सामान्यता उम्र और फीस जैसी छूट हासिल करना मजबूरी है।


ओबीसी की आबादी देश की आबादी का 52 फीसदी है। आर्थिक और सामाजिक रूप से अशक्त होने के कारण इस वर्ग के लिए 27 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया गया।


इस वर्ग को समान अवसर उपलब्ध कराने के लिए तय किया जाय कि किसी भी परिस्थिति में अगर आरक्षित वर्ग का कैंडिडेट सामान्य वर्ग के समान या उससे अधिक नंबर पाता है तो ऐसे कैंडिडेट को अनारक्षित कोटे में नौकरी दी जाए। अगर ऐसा नहीं हुआ तो आरक्षित वर्ग संविधान प्रदत्त आरक्षण के अधिकार से वंचित होंगे।