भारत आरसीईपी समझौते पर हस्ताक्षर ना करे , भारतीय अर्थव्यवस्था और देश के खुदरा व्यापार के लिए हानिकारक


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सुशील कुमार जैन संयोजक (दिल्ली एन सी आर )कंनफेडरेशन आफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने चीनी सामानों के बहिष्कार की बात करते हुये  कहा कि जब भी पाकिस्तान के साथ जब भी कोई मुद्दा होता है, चीन ने हमेशा पाकिस्तान का पक्ष लिया है जिसने व्यापारियों को इस बात के लिए प्रेरित किया की देश के दुश्मन को पनाह देने वाले चीन के उत्पादों का बहिष्कार कर उसे सबक सिखाया जाए ! कई वर्षों से चले इस अभियान के परिणाम अब सामने आए हैं । भारत और चीन के बीच व्यापार का अंतर काफी खतरनाक है और यह भी एक कारण है जिसके चलते व्यापारियों ने चीनी सामानों के स्थान पर भारतीय वस्तुओं को प्रमुखता देने का निर्णय लिया । यही कारण है कि इस वार चीन से आयात काफी घट गया । यदि सरकार इस मुद्दे पर कोई एक समर्थन नीति लाती है जिसमें  घरेलू छोटे निर्माताओं को प्रतिस्पर्धी दरों पर गुणवत्ता के सामान का उत्पादन करने में तकनीकी एवं वित्तीय सहायता मिलती है तो निश्चित रूप से हमारी चीन पर माल के लिए निर्भरता कम हो जायेगी !


 सुशील कुमार जैन ने  कहा की इस मुद्दे पर चिंता का विषय है की यदि भारत आरसीईपी समझौते पर हस्ताक्षर करता है तो चीनी वस्तुओं पर आयात शुल्क कम करना पड़ेगा जो राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था और देश के खुदरा व्यापार के लिए हानिकारक होगा। हालाँकि, हम केंद्रीय वाणिज्य मंत्री श्री पीयूष गोयल के बयान से आश्वस्त महसूस करते हैं कि ऐसे किसी भी समझौते पर हस्ताक्षर करते समय घरेलू व्यापार और उद्योग के हित सरकार की प्राथमिकता पर होंगे किन्तु यदि आरसीईपी किसी भी बजह से साईन किया गया तव भारतीय व्यापार को निश्चित ही हानि होगी। अतः हम निवेदन करते है कि भारत किसी भी दवाव मे ना आये और आरसीईपी पर कोई समझौता  ना करे।


 


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