पेय जल के लिए घर घर नल

  
भाजपा ने गत लोकसभा चुनाव में अपने संकल्प पत्र में हर घर को पेयजल उपलब्ध कराने का संकल्प व्यक्त करते हुए यजल समस्या का समाधान करने  का वायदा किया था। चुनाव में अप्रतिम सफलता प्राप्त कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री के रूप में  अपनी द्वितीय पारी की शुरुआत करते ही संकल्प पत्र में किए गए वायदे को पूर्ण करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए जल संसाधन, नदी विकास ,गंगा जीर्णोद्धार और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग को शामिल कर इन मंत्रालयों को संगठित कर  जल शक्ति मंत्रालय का गठन किया और उसको देश में व्याप्त जल समस्या को समाप्त करने तथा हर घर को नल से पानी उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य करने हेतु निर्देशित किया। प्रधानमंत्री ने स्वयं नीति आयोग की बैठक में हर घर को पेयजल उपलब्ध  कराने के संदर्भ में रीति नीति को व्यक्त कर उस पर अविलंब तथा द्रुतगामी कार्यवाही कर 2024 तक उपलब्ध कराने हेतु समय सीमा भी निर्धारित कर दी है। प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तावित यह योजना उनकी अन्य प्रभावी सौभाग्य योजना, उज्जवला योजना तथा स्वच्छता अभियान जैसी महत्वपूर्ण  अत्यंत क्रांतिकारी योजना है। सौभाग्य योजना के अंतर्गत मोदी सरकार ने देश के कोने कोने में बिजली पहुंचा कर लगभग हर घर तक बिजली पहुंचाने का अपना लक्ष्य प्राप्त कर लिया है। इसी प्रकार उज्जवला योजना के अंतर्गत समाज के निम्नतम तबके तक गैस चूल्हा पहुंचा कर उज्जवला योजना को सार्थक किया है। स्वच्छता अभियान के द्वारा जहां एक और समाज में साफ सफाई एवं स्वच्छता हेतु जागरूकता अभियान चलाते हुए अपने चारों ओर सफाई बनाए रखने हेतु आमजन को जागरूक किया गया वहीं दूसरी ओर घर घर शौचालयों की व्यवस्था कर खुले में शौच जाने की परंपरा को लगभग समाप्त कर दिया है । अब उनकी हर घर को नल से पानी की योजना अपने आप में बहुत ही महत्वपूर्ण तथा क्रांतिकारी है, सरकार की प्रतिबद्धता एवं कर्म  परायणता को देखते हुए उम्मीद है कि निर्धारित की गई समयावधि में हर घर को नल से पानी प्राप्त हो जाएगा किंतु इस योजना के समक्ष राष्ट्र में जल का अभाव ,निरंतर गिरता हुआ जल स्तर तथा जल संरक्षण का समुचित प्रबंधन न होना योजना को निश्चित समयावधि के अंतर्गत पूर्ण कर पाने के संदर्भ में प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है किंतु निरंतर जल संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में कार्य कर योजना को मूर्त रूप दिया जा सकता है।     यह अलग तथ्य है कि अभी तक सिर्फ 65% घरों में ही नल से पानी पहुंचाने का काम हो रहा है।    भारतीय घरों में नल के माध्यम से पानी पहुंचाने का कार्य काफी तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2014 से2018 के मध्य 6.7% की वृद्धि से घरों में पानी के कनेक्शन के लिए नल लगाए गए। 2011 से 2014 के मध्य में यह आंकड़ा 4% था और 2001 से 2011 में यह मात्र 0.6% ही था। पानी के कनेक्शन लगाने और नल से पानी पहुंचाने की दिशा में गांव में वृद्धि का आंकड़ा शहरों से अधिक है ।2014 से 2018 के मध्य गांव में यह 28% और शहरों में 22% के करीब रहा ।ग्रामीण इलाकों में अभी भी लगभग 60% घर ऐसे हैं जहां पानी का नल कनेक्शन नहीं पहुंचा है। ग्रामीण इलाकों में भी ऐसे जिले जो सबसे गरीब की श्रेणी में आते हैं वहां तक पानी का कनेक्शन अभी नाम मात्र की संख्या में ही पहुंचा है।     उत्तर प्रदेश बंगाल बिहार जैसे अनेक राज्य अब भी हैं जिनकी आधी जनसंख्या को अभी भी पानी की सप्लाई नहीं की जा रही है। महाराष्ट्र और तमिलनाडु ऐसे राज्य हैं जहां 70% से अधिक घरों में पानी के लिए नल लगाए जा चुके हैं ।इन राज्यों के शहरी और ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों में नल का प्रयोग पानी के लिए किया जा रहा है।         
आज सरकार ने योजना को मूर्त रूप देने के लिए राज्यों के साथ मिलकर जल से जुड़ी समस्याओं का समाधान कर हर हालत में लक्ष्य को प्राप्त करने हेतु जल शक्ति मंत्रालय को निर्देशित किया है। केंद्रीय जनशक्ति मंत्री के अनुसार हर घर जल की योजना को 2050 की आवश्यकता को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है देश में बारिश और अन्य संसाधनों से मिलने वाले जल का मात्र 5% ही पेयजल के रूप में प्रयोग हो रहा है। आज सरकार की प्रमुख चुनौती कृषि के लिए आवश्यक जल उपलब्ध कराने की है ।बड़ी मात्रा में जल कृषि और औद्योगिक इकाइयों में प्रयोग होता है ।अनेक जल स्रोतों का जल प्रदूषित हो चुका है ,उसकी गुणवत्ता प्रभावित है। 27544 जगहों पर आर्सैनिक और अन्य कारण से पानी की गुणवत्ता दोषपूर्ण है प्रदूषित है। सरकार उनमें से 11200 जल स्रोतों की गुणवत्ता सुधारने का कार्य अपने हाथ मेंले चुकी है ।साथ ही 4071 जल स्रोतों की गुणवत्ता सही हो चुकी है और करीब 5000 पर काम चल रहा है ।केंद्र सरकार इस काम के लिए राज्यों की मदद कर रही है ।पर्वतीय राज्यों में पेयजल को लेकर कई योजनाएं चल रही हैं । राज्यों को सूचित किया गया है कि जितनी तेजी से योजनाओं पर कार्य कर उन्हें पूर्ण करेंगे केंद्र सरकार उन्हें उतनी अधिक आर्थिक मदद देगी।आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अभी इस दिशा में बहुत अधिक कार्य किया जाना लंबित है ।गांव में पाइप लाइन के जरिए पानी पहुंचाने की वृद्धि दर 2013 -14 में 12% थी जो2017-18 में  17% तक ही पहुंच पाई है,जिसमें त्वरित गति से कार्य करते हुए राज्यों से तालमेल बिठाकर कार्य संपन्न किया जाना है। बिहार उत्तर प्रदेश सहित अनेक राज्यों में इस दिशा में प्रभावी कार्यवाही प्रारंभ कर दी गई है। उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड में तो राज्य सरकार द्वारा विधिवत कार्य भी प्रारंभ कर दिया गया है ।यह अलग तथ्य है कि बुंदेलखंड के चित्रकूट जिले में ही एशिया की सबसे बड़ी पेयजल योजना पाठा जल योजना लगभग पांच दशक पूर्व से कार्य कर रही है किंतु उसके द्वारा किया गया कार्य तथा घर-घर तक नल से पानी पहुंचाने की योजना अभी दिवास्वप्न ही है। हां यह बात अलग है कि पानी के लिए तरस रहे पाठा क्षेत्र के अनेक गांवों  में इस योजना के माध्यम से येन केन प्रकारेण पानी उपलब्ध करा दिया गया है । देश में व्याप्त जल समस्या एवं पेयजल की उपलब्धता को सुनिश्चित करने हेतु हेतु जल संरक्षण और उसके सदुपयोग के लिए भी आमजन को जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है सरकार द्वारा पूर्व में स्वच्छता मिशन के लिए स्वच्छता दूत या स्वछताग्रहियों के चयन की भांति जलदूतों की नियुक्ति करने  की भी योजना बनाई गई है,जो जनसामान्य के बीच पहुंचकर निरंतर गिर रहे जलस्तर को सामान्य बनाए रखने हेतु प्रयास करने , जल के हो रहे अपव्यय को बंद करने तथा आवश्यकता अनुसार कम से कम जल का प्रयोग करने हेतुसमाज को जागृत करने का कार्य करेंगे। इस संदर्भ में जल स्रोतों का संरक्षण तथा भूगर्भ के जल स्तर में हो रही निरंतर गिरावट को दूर कर उसका बढ़ाया जाना तथा प्राप्त जल का सर्वाधिक सदुपयोग मुख्य कार्य हैं। इसके लिए मनरेगा योजना की मदद से नए-नए जल स्रोत तालाब आदि बनाकर तथा पुराने तालाबों का जीर्णोद्धार कर उन पर जल संग्रह कर भूगर्भ के जल के स्तर को बढ़ाना प्रमुख तथा आवश्यक कार्य होगा, किंतु व्यवहार में आज भूगर्भ के जल स्तर को बढ़ाने के स्थान पर उसका निरंतर दोहन किया जा रहा है ।सिंचाई के साथ साथ औद्योगिक इकाइयों ,फैक्ट्रियों आदि के लिए बोरिंग कर भूगर्भ से असीमित मात्रा में जल निकालकर उसका दुरुपयोग किया जा रहा है ,साथ ही भूगर्भ से निकाला गया जल औद्योगिक उत्पादन के पश्चात् प्रदूषित होकर भूगर्भ में ही चला जाता है या नालों के माध्यम से नदियों में पहुंचकर वहां के जल को भी प्रदूषित करता रहा है। आज जल की अनुपलब्धता के साथ -साथ उसका प्रदूषित होना पेयजल की समस्या के  प्रमुख कारण के रूप में विद्यमान है ,जिस पर नियंत्रण प्राप्त करना और उसे समाप्त करना, सरकार के समक्ष प्रमुख चुनौती तथा उसका दायित्व है ,जिसका समाधान प्राप्त किए बिना घर-घर तक जल पहुंचाने की योजना को अमलीजामा नहीं पहनाया जा सकता। इसके लिए आवश्यक है कि भूगर्भ के जल के दोहन पर अंकुश लगाते हुए किसी भी प्रकार के ट्यूबवेल की स्थापना पर रोक लगाई जाए । बिना अनुमति प्राप्त किए बोरिंग कर भूगर्भ से जल निकालने की कवायद को दंडात्मक कार्यवाही घोषित कर दी जाए। साथ ही जल संरक्षण की योजनाओं पर निरंतर निगरानी रखते हुए जल संरक्षण, संवर्धन तथा शोधन की दिशा में कार्य करने वाले सरकारी ,गैर सरकारी लोगों तथा संस्थाओं को इस दिशा में कार्य हेतु प्रोत्साहित किया जाए तथा जल संरक्षण और संवर्धन को कानून का संरक्षण प्रदान करते हुए वाटर हार्वेस्टिंग को अनिवार्य बनाया जाए। किसी भी प्रकार के निर्माण को प्रारंभ करने के पूर्व यह सुनिश्चित कर लिया जाए कि संबंधित स्थल पर वाटर  हार्वेस्टिंग का कार्य पूर्ण कर लिया गया है अन्यथा स्थिति में किसी भी प्रकार से निर्माण प्रारंभ न करने दिया जाए और इसको देखने का उत्तरदायित्व संबंधित अधिकारियों को देते हुए उनसे इसका अनुपालन कड़ाई से सुनिश्चित कराया जाए। यदि यह समस्त स्थितियां बन गई तो निश्चित रूप से जल विहीन हो रही भारत भूमि पुनः जल से परिपूर्ण होगी तथा पानी की समस्या से जूझ रहा जनमानस पानी की समस्या से मुक्त होगा और भारत भूमि उर्वरा होकर फसलों एवं धन-धान्य से परिपूर्ण हो सस्य श्यामला बनकर नए स्वरूप में उपस्थित होगी जहां पानी की कोई मारामारी नहीं होगी तथा प्रधानमंत्री जी की योजना हर घर को नल से पानी सफल होगी तथा प्रत्येक घर को नल के माध्यम से पानी उपलब्ध कराया जाना संभव होगा।


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