इंसान को नकारात्मक विचारों से बचना चाहिए : योगेश मिश्र

पर्यावरण सुरक्षा महज एक सरकारी एजेण्डा ही बन कर रह गया : राधेश्याम दीक्षित


शहरा मेला पार्क में मनाया गया 'यूनाइट पर्यावरण उत्सव'


लखनऊ। पर्यावरण और जीवन का एक दूसरे से अटूट संबंध है, इसी से मनुष्य को जीने की मूलभूत सुविधा उपलब्ध होती है, इसलिए इसके संरक्षण, संवर्धन और विकास की दिशा में ध्यान देना सभी का कर्तव्य है। पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देशय से यूनाइट फाउण्डेशन ने एक बड़े अभियान की शुरुआत की है जिसका नाम 'यूनाइट पर्यावरण उत्सव' है। यह कार्यक्रम यूनाइट फाउण्डेशन महीने के दूसरे रविवार  को पूर्व निधारित पार्क या स्थान पर आयोजित करता है। इस बार सितम्बर महीने के दूसरे रविवार 8 तारीख को दशहरा मेला पार्क जानकीपुरम में कार्यक्रम को आयोजित किया गया। जिसमें बड़ी तादाद में बच्चे, बुजर्ग और महिलाएं शामिल हुईं। जिसमें बच्चों को पर्यावरण से जुड़े विषयों पर जानकारी दी गयी।


इस कार्यक्रम के मुख्यवक्ता वैज्ञानिक डा. उमाशंकार, सनातन ज्ञान पीट के संस्थापक योगेश कुमार मिश्र, और यूनाइट फाउण्डेसन के उपाध्याक्ष राधेश्याम दीक्षित थे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उमाशंकर श्रीवास्ताव ने बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के बारे में समझाते हुए कहा कि अगर पर्यावरण बचेगा तभी हमरा जीवन बचेगे। इसलिए हमें अपने आस पास उपस्थित सभी पेड़, पौधों और जीव जन्तुओं को देख रेख करनी चाहिए और उन्हे कभी हानि नहीं पहुंचानी चाहिए। उमाशंकर श्रीवास्ताव ने  बच्चों से  कहा कि वैज्ञानिक बनने के लिये ध्यय की सबसे ज्यादा जरूरत है इस लिए अपना आत्मविश्वास कभी न गिरने दें। उन्होंने बच्चों का हौसला बढ़ते हुए कहा कि हर बच्चा अपने लक्ष्य को पा सकता है, अगर वह एकाग्रचित होकर अपने लक्ष्य की तरफ बढ़े। डा. उमाशंकर श्रीवस्ताव ने बच्चों को विज्ञान के प्रकार और विज्ञान से होने वाले लाभ के बारे में भी जानकारी दी। साथ ही उन्होंने पेड़, पौधों के रख रखाव के लिए भी उत्साहित किया।


वहीं पार्क में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए योगेश कुमार मिश्र ने कहा, प्रत्येक हिन्दू परम्परा के पीछे कोई न कोई वैज्ञानिक रहस्य छिपा हुआ है। हिन्दू धर्म के संबंध में एक बात दुनिया मानती है कि हिन्दू दर्शन 'जियो और जीने दो  के सिद्धांत पर आधारित है। यह विशेषता किसी अन्य धर्म में नहीं है। वैदिक वाङ्मयों में प्रकृति के प्रत्येक अवयव के संरक्षण और संवर्धन के निर्देश मिलते हैं। हमारे ऋषि जानते थे कि पृथ्वी का आधार जल और जंगल है।


 उन्होंने बच्चो से कहा, हम सभी को हमेश सकारात्मक रहना चाहिए क्योकि नकारात्मक बातें इंसान की क्षमता को कम कर देती है। इसलिए हमें नकारात्मक विचारों से बचना कर एक अच्छे समाज का निर्माण करना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि बच्चों को टीवी देखने से बचना चाहिए। टीवी देखने के बजाए बच्चों को अपने मां और दादी, दादा से अच्छी-अच्छी कहानियां सुननी चाहिए। इसके साथ ही  उन्होंने बच्चों से देशी गाय का दूध पीना की अपील की, और कहा कि देशी गाय की दूध में जो ताकत है वह किसी दूध में नहीं है।


कार्यक्रम के संचालक यूनाइट फाउडेशन के उपाध्यक्ष राधेश्याम दीक्षित ने पार्क उपस्थित सभी लोगों से पार्यवरण संरक्षण के लिए आगे आने की अपील करते हुए कहा, आज पर्यावरण एक जरूरी सवाल ही नहीं बल्कि ज्वलंत मुद्दा बना हुआ है लेकिन आज लोगों में इसे लेकर कोई जागरूकता नहीं है। ग्रामीण समाज को छोड़ दें तो भी महानगरीय जीवन में इसके प्रति खास उत्सुकता नहीं पाई जाती। परिणामस्वरूप पर्यावरण सुरक्षा महज एक सरकारी एजेण्डा ही बन कर रह गया है। जबकि यह पूरे समाज से बहुत ही घनिष्ठ सम्बन्ध रखने वाला सवाल है। जब तक इसके प्रति लोगों में एक स्वाभाविक लगाव पैदा नहीं होता, पर्यावरण संरक्षण एक दूर का सपना ही बना रहेगा। पर्यावरण का सीधा सम्बन्ध प्रकृति से है। राधेश्याम दीक्षित ने उपस्थित सभी लोगों से पर्यावरण संरक्षण के लिए अपील की। इस अवसर पर पार्क में बच्चों के साथ माधुरी पांडेय, ज्योत्सना सिंह, विमला देवा, सुकीर्ति मिश्रा, सुग्रीव मौर्य, अमरीष वर्मा, सुशीला वर्मा, आईआईटीआर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. उमाशंकार श्रीवास्तव, सनातन ज्ञान पीट के संस्थापक योगेश कुमार मिश्र, यूनाइट फाउण्डेशन के उपाध्यक्ष राधेश्याम दीक्षित, दीपक मिश्र, अभिमन्यु वर्मा और राधेलाल गुप्ता आदि लोगो उपस्थित थे। कार्यक्रम का अंत राष्ट्रगान के साथ किया गया।


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