दलित और अन्य वंचित समुदायों पर बढ़ते हमलों पर चर्चा

दलित संगठनों और कार्यकर्ताओ की एक बैठक आज हुई जिसमे दलित और अन्य वंचित समुदायों पर बढ़ते हमलों पर चर्चा की गई,  खासकर एनडीए 2 के सत्ता में आने के बाद। बैठक में भाग लेने वालों में के॰ राधाकृष्णन और रामचंद्र डोम (अध्यक्ष और महासचिव DSMM), उदित राज (राष्ट्रीय अध्यक्ष, AI SC / ST संघ), अशोक भारती (अखिल भारतीय अंबेडकर महासभा), सुनीता कुमार और मुन्नी सिंह (बामसेफ), ओमवीर और बीर सिंह (बीएसएनएस), सुमेध बोध (राष्ट्रीय दलित महिला आंदोलन), एमएल खारोलिया (आवाम संघ) और अन्य शामिल थे।


उनके द्वारा जारी किए गए एक बयान में सभी प्रतिनिधियो ने दलितों पर हो रहे निरंतर अत्याचार के मामलों का उदाहरण दिया है जो की नई सरकार के सत्ता संभालने के बाद दैनिक तौर पर हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यहां तक कि सरकार ने लोकसभा में स्वीकार किया है कि 1 अप्रैल से 15 जून 2019 के बीच 99 ऐसे मामले दर्ज किए गए थे। बेशक संख्या बहुत अधिक है। अत्याचार में महिलाओं और नाबालिगों के साथ क्रूर बलात्कार और हत्या, पुलिस थानों में अत्याचार और हत्याएं, अंतरजातीय विवाहित जोड़ों की हत्या, लिंचिंग और अन्य बर्बर हमले शामिल हैं। इनमें से अधिकांश मामले भाजपा शासित राज्यों में हुए हैं और दुर्भाग्य से, सरकारों ने पीड़ितों की रक्षा के लिए कोई काम नही किया है और अपराधियों को दंडित भी नहीं किया है।


सनद रहे कि इस अवधि में सफाई कर्मचारियों की कई मौतें भी हुई हैं।


बयान में आगे कहा गया है कि सरकार ने इस अवधि में संवैधानिक संस्थानों को भी कमजोर किया है। इसने आरटीआई कानून को निष्प्रभावी बनाने और अभियोजन पक्ष के मुक़ाबले आतंकवाद के आरोपी को अब अपनी बेगुनाही का सबूत देने होगा और यह क्रूर फैंसला बहुमत का इस्तेमाल कर किया गया है। संसद के समक्ष रखे गए 2019-20 के बजट में भी छात्रवृत्ति कम कर दी गई और सफाई कर्मचारियों के कल्याण आदि पर अनुसूचित जाति समुदाय के साथ घोर अन्याय किया है। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के तेजी से निजीकरण की नीति सरकार द्वारा अपनाई जा रही है। यह बजट अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/ अन्य पिछड़ा वर्ग के समुदायों के लिए उपलब्ध रोजगार के अवसरों में भी भारी कमी लाएगा और चूंकि निजी क्षेत्र में कोई आरक्षण नहीं है, इसलिए उन्हें कोई नई नौकरी उपलब्ध नहीं कराई जाएगी।


बयान ने इस तथ्य पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की कि सरकार, एससी और एसटी समुदायों के बीच भूमिहीनता की समस्या को दूर करने के बजाय वास्तव में कानूनों को बदल रही है और उन्हे उन जमीनों से बेदखल करने के लिए ऐसा किया गया है, जिन्हें वे पारंपरिक रूप से जोतते रहे हैं। कॉर्पोरेट को मिल रहे राज्य के समर्थन से बड़े पैमाने पर भूमि हड़पने का काम चल रहा हैं। सोनभद्र जिले (यूपी) में गरीब आदिवासियों का हालिया नरसंहार, शक्तिशाली लोगों द्वारा उन पर गोलियों की बौछार, 11 की हत्या, जिसमें 3 महिलाएं शामिल हैं, दिन के उजाले में इसका सबसे हालिया और सबसे भयानक उदाहरण है।


बैठक में भाग लेने वाले सभी लोगों ने फैसला किया कि वे राष्ट्रपति को जल्द से जल्द अपने ज्ञापन के साथ मिलेंगे। वे अधिक से अधिक संगठनों और कार्यकर्ताओं से भी संपर्क करेंगे ताकि दलितों और शोषितों के अधिकारों के लिए एक मजबूत, एकजुट आंदोलन चलाया जा सके। यह राष्ट्रीय और राज्य दोनों स्तरों पर किया जाएगा। उन्होंने लोकतांत्रिक संगठनों, सामाजिक आंदोलनों और राजनीतिक दलों से भी आवाज उठाने और इस संघर्ष में शामिल होने की अपील की।