भारत-अमेरिकी व्यापार नीति के मसले हल करने के लिए विशेष कार्य बल का गठन ज़रूरी

     नई दिल्ली:
देशी व्यवसाय को विशेष सुरक्षा देने पर जोर और भौगोलिक राजनीतिक तनाव बढ़ने से न केवल विश्व व्यापार प्रभावित हुआ है बल्कि व्यापार नीतियों में अनिश्चितताएं आ गई हैं। अमेरिकी-चीनी व्यापार संबंधों में तनाव है और टैरिफ को लेकर बदले की कार्यवाही से विशेष कर भारत सहित भारत-प्रशांत क्षेत्र के देशांे में अवसर बढ़ने की संभावना है। इंटरनेशनल चैम्बर आॅफ काॅमर्स के एक पैनल डिस्कशन में इन अनिश्चिताओं से होने वाली गतिविधियों पर विमर्श किया गया।


''अमेरिका के साथ भारत का रणनीति सहयोग बढ़ने के लिए आर्थिक सहयोग बढ़ना आवश्यक है,'' श्री विक्रमजीत सिंह साहनी, अध्यक्ष, आईसीसी ने बताया। ''भारत-अमेरिकी व्यापार संबंधों का दोनों देशों के हित में अच्छा होना जरूरी है क्योंकि तनाव की वजह से अमेरिका भी नुकसान में है क्योंकि भारत में उसका रक्षा, एयरोस्पेस, कृषि उत्पाद आदि का बड़ा बाजार है,'' श्री साहनी ने जानकारी दी।
इस संदर्भ में नई दिल्ली में एक पैनल डिस्कशन हुआ। इसमें विश्व व्यापार के विशेष जानकार, अर्थशास्त्री, पूर्व भारतीय उच्चायुक्त और राजनयिक शामिल हुए। जी 20 और जी 7 के लिए प्रधानमंत्री के शेरपा श्री सुरेश प्रभु इस अवसर पर मुख्य अतिथि थे।
''आज भारत में असीम अवसर हैं क्योंकि यह सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है; लोगों में उपभोग का चलन और विश्व अर्थव्यवस्था में देश का वजन बढ़ा है। इसलिए चीन से परे हट कर निवेश के इच्छुक लोगों के लिए यहां निस्संदेह सुनहरा अवसर है। वे दोनों देशों के लिए निर्यात के अवसर भी देख सकते हैं,'' श्री साहनी ने बताया। 


अमेरिका में भारत के पूर्व उच्चायुक्त श्री नवतेज शर्मा ने कहा, ''भारत-एशिया-प्रशांत क्षेत्र पूरी तरह से भारत-अमेरिकी व्यापार संबंधों पर निर्भर है। और अमेरिका को भारत जैसा विशाल बाजार से बेहतर रणनीतिक साझेदार नहीं मिलेगा। पूर्व वाणिज्य सचिव श्री राजीव खेर ने बताया कि ई-काॅमर्स और डाटा लोकलाइजेशन केवल भारत और अमेरिका नहीं बल्कि पूरी दुनिया में हो रहा है। इसलिए अमेरिका को चाहिए कि इस मसले को व्यापारिक संबंध मजबूत करने के मद्देनजर देखे। कजाकिस्तान, स्वीडेन और लाटविया में भारत के पूर्व उच्चायुक्त और इंडियन इंस्टीट्यूट आॅफ ग्लोबल स्टडीज़ के अध्यक्ष श्री अशोक सज्जनहार ने कहा कि उच्चतम स्तर पर संपर्क-संवाद की कमी दिख रही है और तनाव कम करने हेतु हमें आयात जैसे क्षेत्रों पर भी ध्यान देना होगा। पैनल के विचारकों ने भारत के शक्तिशाली बन कर उभरने का जिक्र करते हुए कहा कि देश ने मेक इन इंडिया जैसी मैत्रीपूर्ण नीतियों के साथ विदेशी कम्पनियों को भी भारतभूमि पर उत्पादन की बेहतर सुविधाएं दी है। 


जानकार इस पर एकमत थे कि भारत एशिया का सबसे बड़ा उत्पादन गढ़ बनने की महत्वाकांक्षा पूरी करने के लिए तैयार है और विकसित देशों के निवेश और उनकी आधुनिक तकनीक के बल पर अपने विशाल कार्य बल के लिए रोजगार सुनिश्चित करेगा। लेकिन भारत में इन अवसरों को साकार करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण अनुकूल नीति और अमेरिका-भारत के ऐजेंड में तालमेल बनाना है।


सुरेश प्रभु ने बताया कि भारत-अमेरिकी संबंध लंबे समय से मजबूत रहा है। हम विश्व व्यापार बढ़ाने के पक्षधर हैं और सच यह है कि विश्व व्यापार की दर वैश्विक अर्थव्यवस्था के विकास की दर से अधिक है। मेरे लिए आईसीसी का अर्थ संपूर्ण व्यवसाय जगत को एकजुट करना और इन बुद्धिमान लोगों ने पूरी दुनिया में आधुनिक तकनीक को बढ़ावा देने के प्रयास किए हैं। हमारे संबंधों की मजबूती बढ़ने से आने वाले समय में ज्यादा अवसर दिखेंगे।


विमर्श में विशिष्ट विचारक डाॅ. संजय बारू भी मौजूद थे जो पूर्व प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार रहे हैं। उन्होंने बताया, ''भारत-अमेरिकी व्यापार संबंधों की चुनौतियों की वजह भारत का तेजी से बढ़ना है। भारत ने अमेरिका से ज्यादा तेजी से तरक्की की है इसलिए अमेरिका हम पर दबाव बना रहा है।'' श्री बारू भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग संघ के पूर्व महासचिव भी रहे हैं।


''भारत विभिन्न स्तर पर निरंतर संपर्क-संवाद और लाॅबी कर अमेरिकी संबंध सुधार सकता है। तकनीकी के मसलों का हल करने के लिए कार्य बल का गठन करना होगा,'' डाॅ. हरिंदर सेखों, सलाहकार, विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन ने इस विमर्श में बताया।
पैनल डिस्कशन पर आईसीसी के अध्यक्ष श्री विक्रमजीत सिंह साहनी ने कहा, ''भारत-अमेरिकी व्यापार संबंधों में हाल में चुनौतियां आई हैं और यह विमर्श उनके समाधान पर केंद्रित है जो आगामी अवसरों के बारे में भी जानकारी देगा। मेरा मानना है कि भारत के लिए चित भी मेरी, पट भी मेरी है और हमारे पास आॅफसेट की बिल्कुल स्पष्ट नीति है। आशा है इस विमर्श से दोनों देशों के व्यापार संबंधों के लिए सही नीति बनाने में मदद मिलेगी।''


।इवनज प्ब्ब्        
  


आईसीसी का परिचय
इंटरनेशनल चैम्बर आॅफ काॅमर्स दुनिया का सबसे बड़ा, सबसे अधिक प्रतिनिधित्व वाला व्यवसाय संघ है। 100 से अधिक देशों में इसके 60 लाख सदस्यों को निजी उद्यम जगत के सभी पहलुओं में दिलचस्पी है। इसके तीन मुख्य उद्देश्य हैं: नियम बनाना, विवाद निपटाना और सही नीति के लिए आवाज उठाना। आईसीसी की सदस्य कम्पनियां और संगठन खुद अंतर्राष्ट्रीय कारोबार में हैं इसलिए आईसीसी का देश के सीमा पार के कारोबारों पर लागू होने वाले नियम बनाने का पूर्ण विवेकाधिकार है। नियम निस्संदेह स्वैच्छिक हैं पर हर दिन लाखों ट्रांजेक्शन पर लागू होते हैं और अंतर्राष्ट्रीय कारोबार का हिस्सा बन गए हैं। 


100 से अधिक देशों की राष्ट्रीय समितियों का वैश्विक नेटर्वक राष्ट्र और क्षेत्र स्तर पर व्यवसाय को प्राथमिकता देने की आवाज बुलंद करता है। आईसीसी की सदस्य कम्पनियों के 3,000 से अधिक विशेष जानकारों ने व्यावसायिक मसलों पर आईसीसी की राय बनाने के लिए जानकारी और अनुभव साझा किए। 


आईसीसी अंतर्राष्ट्रीय व्यवसाय की ओर से संयुक्त राष्ट्र संघ, विश्व व्यापार संगठन और अंतर्राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय अंतरसरकारी संगठनों जैसे जी 20 के कार्यों का समर्थन करता है। आईसीसी पहला संगठन है जिसे संयुक्त राष्ट्र संघ आर्थिक एवं सामाजिक परिषद में सामान्य सलाहकार और संयुक्त राष्ट्र के आॅजर्वर का स्टैटस दिया गया।


 


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