योगा थिरेपी ओस्टियो आर्थराइटिस और जोड़ों की अन्य समस्याओं में लाभदायक है : आर्थोपेडिक विशेषज्

दुनिया भर में जब विश्व योग दिवस के आयोजनों के बीच घुटने की आर्थराइटिस पर प्रकाशित क्लिनिकल अनुंसंधान आधारित नई पुस्तक में आर्थोपेडिक विशेषज्ञों ने दावा किया है कि आसन (शारीरिक मुद्रा), प्रणायम (श्वसन क्रिया), ध्यान और अध्यात्मिक एवं भावनात्मक विचार प्रणाली पर आधारित योग थिरेपी जोड़ों की गंभीर समस्या ओस्टियो आर्थराइटिस के कारण उत्पन्न समस्याओं का समाधान करने में मददगार साबित होती है।
''घुटने की ओस्टियो आर्थराइटिस के प्रबंधन में जीवन शैली संबंधित सुधार'' नामक अपने शोध पत्र में आर्थराइटिस विशेषज्ञ एवं शोधकर्ता डा. विवेक कुमार श्रीवास्तव ने कहा है कि योगा थिरेपी की मदद से कार्टिलेज प्रोटियोग्लायकम घटक में वृद्धि की जा सकती है और कार्टिलेज को क्षतिग्रस्त होने से रोका जा सकता है। योग क्वार्डिसेप्स और हैमस्ट्रिंग्स जैसी उन खास मांसपेशियों को मजबूत बनाने में सहायक है जो जोड़ों के दर्द को कम करने के लिए सिकुड़ती है।
''नी अेस्टियोआर्थराइटिस - क्लिनिकल अपडेट'' पुस्तक के संपादक प्रो. (डा.) राजू वैश्य ने कहा कि 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के तौर पर मनाए जाने की संयुक्त राष्ट्र की घोषणा के बाद से योग को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बहुत अधिक लोकप्रियता मिली। हालांकि आधुनिक चिकित्सा में व्यापक स्वीकृति के लिए प्रमाणों की जरूरत होती है खास तौर पर चिकित्सा अनुसंधान समुदाय के बीच। इस पुस्तक में शामिल यह अध्ययय इस दिशा में एक कदम है। मुझे उम्मीद है कि चिकित्सा अनुसंधानकर्ता उन अन्य रोगों में व्यापक स्तर पर अनेक प्ररीक्षणों एवं अध्ययनों के लिए प्रेरित होंगे जिनमें योग प्रभावकारी रूप से लाभदायक है।''
इंडियन कार्टिलेज सोसायटी के पूर्व अध्यक्ष प्रो. राजू वैश्य ने कहा कि इस पुस्तक में घुटने की ओस्टियोआर्थराइटिस के विभिन्न पहलुओं पर वैज्ञानिक एवं शोधपरक आलेखों को शामिल किया गया है साथ ही ओस्टियो आर्थराइटिस के कई महत्वपूर्ण एवं अनोखे मामलों के बारे में विष्लेशण किया गया है। इस पुस्तक का लोकार्पण 28 जून को ब्रिटेन के लिसेस्टर में आयोजित ब्रिटिश इंडियन आर्थोपेडिक सोसायटी के वार्षिक समारोह में किया जाएगा। डा. राजू वैश्य अनेक अंतर्राष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं के संपादक हैं जिनमें जर्नल आफ क्लिनिकल आर्थोपेडिक्स एंड ट्रौमा तथा इंडियन र्जनल आफ आर्थोपेडिक्स प्रमुख हैं।
डा. श्रीवास्तव बताते हैं कि योग का अभ्यास करने से शरीर के विभिन्न हिस्सों में खिंचाव एवं मजबूती आने के कारण सिनॉवियल तरल की मत्रा में कमी नहीं आती। मसाज करने से भी अंदुरूनी हिस्से में ताजे रक्त का संचार होता है और नर्वस प्रणाली पुनर्जीवित होती है और जोड़ों, मांसपेशियों एवं लिगामेंट में चिकनापन आती है। इसका नर्वस एवं रक्त संचरण प्रणालिया पर अलग-अलग प्रभाव प्रड़ता है। साथ ही शरीर को राहत प्रदान करने वाले कारक सक्रिय होते हैं। अध्ययनों से यह भी पता चला है कि योग तनाव, एंग्जाइटी, डिप्रेशन तथा मूड असंतुलन जैसे अनेक मनोवैज्ञानिक कारकों को घटाने में मदद करता है तथा आत्म संतुष्टि बढ़ता है। जो लोग पुराने दर्द एवं आर्थराइटिस जैसी समस्याओं से पीड़ित है उनके जीवन की गुणवत्ता में सुधार करता है।
डा. राजू वैश्य ने कहा कि वैज्ञानिक अध्ययनों से यह साबित हो चुका है कि योग आर्थराइटिस, कार्पल टनल सिंड्रोम, टेनिस एल्बो, जोड़ों में दर्द, कमर एवं गर्दन दर्द जैसी हड्डियो, जोड़ों और स्पाइन की अनेक समस्याओं में फायदेमंद है। योग से हड्डियों के निर्माण में मदद मिलती है तथा आर्थराइटिस एवं ऑस्टियोपोरोसिस सहित कई मस्कुलोस्केलेटल (हड्डियों एवं मांसपेशियो की) समस्याओं को रोकने में मदद मिलती है। योग के नियमित अभ्यास से हड्डियां मजबूत और स्वस्थ बनती है। इससे शारीरिक पोस्चर में सुधार होता है तथा स्पाइनल कार्ड को स्वस्थ रखने में मदद मिलती है। योग की मदद से पीठ दर्द से छुटकारा पाया जा सकता है। योग मांसपेशियों को लचीला बना देता है, हड्डियों में रक्त संचरण को बेहतर बनाता है तथा कैल्शियम होमोस्टेसिस को बनाए रखने में मदद करता है और इस प्रकार यह ऑस्टियोपोरोसिस को रोकने में मदद करता है।


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