आधुनिक इंडिया के बैनर तले धरती आबा बिरसा मुंडा जयंती धूमधाम से मनाई गई

 



नई दिल्ली : आदिवासी महायोद्धा धरती आबा नाम  से प्रशिद्ध  आदिवासी  महानायक  बिरसा  मुंडा  का  146 वीं  जन्मजयंती रविवार को  राजधानी  दिल्ली  के एनडीएमसी सभागार  बड़े  ही  धूमधाम  से  मनाई  गई .  आधुनिक इंडिया और आधुनिक  इंडिया फाउंडेशन के  बैनर तले  बिरसा  मुंडा  का  146 वी  जन्मजयंती  पर  एक राष्ट्रीय संगोष्ठी  का  भी  आयोजन  किया  गया. विभिन्न  आदिवासी जनगोष्टी के राज्यों के प्रतिनिधियों ने इस संगोष्ठी में भाग लिया.

इस मौके पर मुख्य अतिथि भारत सरकार के अल्पसंख्यक राज्यमंत्री श्री जॉन बारला मौजूद रहे . इस अवसर पर सबसे पहले आदिवासी परंपरा अनुसार सभी अतिथियों का स्वागत किया गया तत्पचात धरती आबा बिरसा मुंडा के चित्र में फूलो द्वारा उनका नमन किया गया उसके उपरांत दीप प्रज्वलित करके सभी अतिथियों का पारम्परिक गमछा से स्वागत किया गया.
कार्यक्रम के दौरान आधुनिक इंडिया फाउंडेशन के अध्यक्ष डी.के.चौहान ने अपने सम्बोधन भाषण में कहा कि सही मायने में बिरसा मुंडा जी का जन्मजयंती 15 नवम्बर को मनाया जाता हैं लेकिन दिल्ली में सभी लोग कार्यरत होने के बजह से उस समय के अगले या बाद के छुट्टी के दिन में यह दिवस मनाते  हैं. इस मौके पर मुख्य अतिथि मुख्य अतिथि भारत सरकार के अल्पसंख्यक राज्यमंत्री श्री जॉन बारला  ने आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी धरती आबा बिरसा मुंडा के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश के आदिवासी उनको भगवान् कि तरह पूजा करते हैं , उनसे प्रेरणा लेते हुए, हमे भी उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए. उनका जीवन पूरा आदिवासियों के उत्थान के लिए समर्पित था, उस धरती आबा को शत शत नमन.
इस मौके पर विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद रहे कोकराझार संसदीय क्षेत्र के लोक सभा सांसद नव कुमार सरनिया ने कहा कि धरती आबा बिरसा मुंडा कि बजह से ही आज हम यहा पर हैं, उन्होंने  सिर्फ 25 वर्ष के उम्र में ब्रिटिश को हिला कर रख दिया था, उन्होंने ब्रिटिश के खिलाफ उलगुलान का शंखनाद किया था, अंत में ब्रिटिश ने उन्हें जहर देकर मार डाला, उन्होंने कहा कि आदिवासी का जमीन ही उनका संपत्ति हैं, अगर उन्हें  जमीन से अलग कर दिया गया तो वह बिल्कुल अकेले रह जायेंगे. जहा भी आदिवासी हैं वहा का जंगल सुरक्षित हैं कहकर उन्होंने कहा. उन्होंने कहा कि मुझे विस्वास हैं कि आगे भी आधुनिक इंडिया फाउंडेशन आदिवासी के लिए इस तरह का कार्य करते रहेंगे. उन्होंने युवाओ को अपने संस्कृति को बचाये रखने का अपील किया अपना संस्कृति ही अपना परिचय हैं कहकर उन्होंने कहा.

इस अवसर पर कार्यक्रम को आईटीबीपी के डीआईजी श्री अशोक कुमार  , भारत सरकार के डिप्टी डायरेक्टर जनरल हिरण्य बोरा, गैल इंडिया लिमिटेड के सीजीएम रामरे टुडू  सामाजिक कार्यकर्ता सुमति कच्छप  , आदिवासी मामलों में विशेषज्ञ प्रमोद कुमार सिंह , महाराज गनि विजेंद्र जी  ने भी कार्यं को सम्बोधित किया. 


धन्यवाद ज्ञापन आधुनिक इंडिया फाउंडेशन के राकेश कुमार गोंड  द्वारा किया गया. कार्यक्रम में सभी प्रतिनिधियों को आधुनिक इंडिया द्वारा स्मृति चिन्ह प्रदान किया गया. कार्यक्रम का सञ्चालन कमल चंद किस्पोट्टा और मदन प्रसाद गोंड ने किया.

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने बिरसा मुंडा के सामाजिक और स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को याद करते हुए आदिवासियों के जंगल और जमीन को बचाने के लिए हर संभव प्रयास करने की जरूरत पर बल दिया। देश के राजनीतिक नेतृत्व द्वारा आजादी के बाद भी बिरसा मुंडा को उचित सम्मान न दिए जाने पर निराशा व्यक्त करते हुए कार्यक्रम में मांग की गईं कि राजधानी में एनडीएमसी एरिया में कहीं उपयुक्त स्थान पर बिरसा मुंडा की मूर्ति लगाईं जाए। उनके नाम पर राजधानी में कम से कम एक सामुदायिक केंद्र का निर्माण किया जाए जहां आदिवासी समुदाय के लोग मिलजुल कर विचार-विमर्श कर सके और अपने कार्यक्रमों को अंजाम दे सके। कार्यक्रम में बिरसा मुंडा के नाम पर एक सड़क या लेन का नाम रखने की भी मांग की गईं।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण असम द्वारा आये गोंड समुदाय के डंडा नृत्य प्रमुख था. असम के गोंड समुदाय द्वारा डंडा नृत्य से सभागार गुम उठे.
कार्यक्रम में बुरारी कुड़ुख ग्रुप, बिनोला संथाल ग्रुप, मेहरोली  ग्रुप द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया. कार्यक्रम में असम, बंगाल, झारखंड, बिहार, मध्य प्रदेश , छत्तीसगढ़ और राजस्थान से भी बड़ी संख्या में लोग आए थे। 

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