मोहब्बत की तड़प

ग़ज़ल


 


मोहब्बत की तड़प कितनी बुरी है


वही है जानता जिसको हुई है


जियो तुम ज़िंदगी को इस तरह से


लगे यूँ एक पल में उम्र जी है


बता सकते नहीं खुल कर जहां को


अजब इन मुफ़लिसों की बेबसी है


तुम्हे देखा है बरसों बाद अब तक


तुम्हारे हुस्न में वो ताज़गी है


 


 


 



जन्म तिथि:23/5/1983


शिक्षा:स्नातक


सम्प्रति:संगीत अध्यापक उपलब्धियां:विविध मुशायरों व सभा संगोष्ठियों में काव्य पाठ विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित विभिन्न मंचों द्वारा सम्मानित



इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

*सेक्टर १२२ में लेडीज़ क्लब ने धूमधाम से मनाई - डांडिया नाइट *

हल्के और मध्यम कोविड-19 संक्रमण के इलाज में कारगर है ‘आयुष-64’

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस: भारतीय विज्ञान की प्रगति का उत्सव