जेईई व नीट परीक्षा कराने के समर्थन में है बसपा

सपा व भाजपा के शासनकाल में कोई विशेष अन्तर नजर नहीं आता - मायावती


केन्द्र व राज्य सरकारें ’आॅनलाइन’ पढ़ाई के सम्बंध में नियोजित तौर पर स्कीम भी लागू करें


नई दिल्ली: बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष, पूर्व सांसद व पूर्व मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश मायावती ने जनहित के कुछ महत्त्वपूर्ण मुद्दों पर आज मीडिया को अपने सम्बोधन में कहा कि वैसे तो भारत सरकार के अनेक मंत्रियों व राज्यों के मुख्यमंत्री व मंत्री, विधायक एवं अधिकारियों सहित अपने भारत देश की कुल जनसंख्या के लगभग 26 प्रतिशत लोग कोरोना महामारी से अभी तक संक्रमित (ग्रस्त) व पीड़ित हैं और अभी भी यह प्रकोप लगातार हर जगह बढ़ता ही जा रहा है, लेकिन फिर भी पहले केन्द्र व उसके बाद माननीय सुप्रीम कोर्ट ने भी देश में वार्षिक परीक्षा ’’जेईई’’ ;श्रम्म्द्ध व ‘‘नीट’’ ;छम्म्ज्द्ध की अगले महीने के प्रारम्भ में कराने का निर्णय ले लिया है। ऐसे में इन परीक्षाओं में शामिल होने वाले लाखों छात्रों व उनके अभिभावकों से मेरा यही कहना है कि अब वे इन परीक्षाओं की हर प्रकार की तैयारी में पूरे जी-जान से लग जायें, और दूसरी तरफ केन्द्र व राज्य सरकारों से भी मेरी खास अपील है कि वे इन परीक्षाओं की हर प्रकार से ऐसी तैयारी व व्यवस्था करें जिससे देश के भविष्य ये छात्र पूरी तरह से सुरक्षित रहें, जो कि बहुत ही जरूरी है। सरकार को इसके लिए हर प्रकार के जरूरी कदम निश्चय ही उठाने चाहिये। इतना ही नहीं बल्कि इन परीक्षाओं के महत्त्व को देखते हुये अब तो माननीय कोर्ट के निर्देशानुसार इन परीक्षाओं में बाहर से शामिल होने वालों को विशेष ‘‘वन्दे भारत विमान सेवा’’ के माध्यम से लाया जाये ताकि वे यहाँ परीक्षा दे सकें। इसलिए सरकारी स्तर पर हर प्रकार का एतिहायत व सावधानी बरतना बहुत ही जरूरी है। इसी प्रकार, कोरोना प्रकोप से जहाँ देश का आम-जनजीवन व अर्थव्यव्स्था आदि बुरी तरह से प्रभावित होकर चरमरा गई है, वहीं हर स्तर की शिक्षा व्यवस्था भी लगभग धाराशायी सी ही हो गई है। इस कारण जहाँ ज्यादातर सरकारी स्कूल बन्द पड़े हैं, लेकिन उनमें से कुछ सरकारी स्कूल व लगभग सभी प्राइवेट स्कूल अभिभावकों से फीस लेने आदि के चक्कर में छोटे-छोटे बच्चों को भी ’’आॅनलाइन’’ पढ़ा रहे हैं, जबकि देश के करोड़ों छात्रों के पास कम्पयूटर, लैपटाप व स्मार्ट फोन आदि की सुविधा नहीं है तथा इण्टरनेट की सुविधा भी देश में काफी असंतोषजनक है, जिससे छात्रों व उनके परिवारों की परेशानी को समझा जा सकता है। इसलिए केन्द्र व राज्य सरकारें इस सम्बंध में नियोजित तौर पर स्कीम लागू करें तो यह आगे के लिए भी बेहतर होगा। इसके साथ ही, खासकर उत्तर


प्रदेश में कोरोना महामारीकाल में भी यहाँ अपराध थमने का नाम नहीं ले रहा है और अब तो लोकतंत्र का चैथा स्तंभ माने जाने वाले मीडिया जगत के लोग भी आएदिन यहाँ हत्या व जुल्म-ज्यादती आदि के शिकार हो रहे हैं, जो प्रदेश की यह अति- दुःखद स्थिति है। आजमगढ़ मण्डल में पत्रकार की हुई हत्या इसका ताजा उदाहरण है। वैसे भी यूपी में सरकार की बदहाली का हाल यह है कि बात-बात पर रासुका, देशद्रोह व अन्य प्रकार के अति-संगीन धाराओं के इस्तेमाल करने के बावजूद भी यहाँ हर प्रकार के अपराध यूपी में कम होने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। अर्थात् यूपी में कानून का अनुचित, जातिगत व द्वेषपूर्ण इस्तेमाल होने के कारण लोगों में न तो कानून का डर बचा है और ना ही कानून का राज ही रह गया है। आमजनता त्रस्त है व इसमें बुरी तरह से पिस रही है। इसलिए सरकार अपनी कार्यशैली में आवश्यक सुधार करे, तो बेहतर है।


मायावती ने कहा कि आजादी के बाद केन्द्र व उत्तर प्रदेश तथा देश के अधिकतर राज्यों में भी काफी लम्बे समय तक कांग्रेस पार्टी ही सत्ता में आसीन रही है, लेकिन इस पार्टी के लम्बे अरसे तक रहे शासनकाल में भी यहाॅ दलितों, आदिवासियों, पिछड़े वर्गों, मुस्लिम व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों तथा अपरकास्ट समाज में से गरीब लोगों की भी आर्थिक स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया है। विशेषकर दलितों व आदिवासियों का सरकारी नौकरियोें में आरक्षण का कोटा तक भी पूरा नहीं किया गया था, अन्य पिछडे वर्गों को भी इस पार्टी के सरकार में आरक्षण देने की व्यवस्था नहीं की गई थी। इस सम्बन्ध में आगे चलकर पहले काका कालेलकर की व फिर मण्डल-कमीशन की आई रिपोर्ट को भी, केन्द्र की कांग्रेसी सरकार ने लागू नहीं किया था इसलिए कांग्रेस पार्टी की ऐसी जातिवादी मानसिकता से दुःखी होकर ही फिर बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने केन्द्र में अपने कानून मंत्री पद से इस्तीफा तक भी दे दिया था। इसी कांगे्रसी सरकार में मुस्लिम समाज के लोग भी सरकारी नौकरियों में धीरे- धीरे काफी कम हो गये थे। साथ ही, हिन्दू-मुस्लिम दंगो में भी खासकर कमजोर वर्गों के लोगों को ही अधिकाशतः आगे करके इनको काफी जानी-मानी नुकसान भी पहुँचाया गया है। इसके साथ ही, इन सभी वर्गों की विकास व उत्थान के लिए बनी योजनायें भी ज्यादातर सरकारी फाईलों में ही सिमट कर रह गई थी। किसान, मजदूर, व्यापारी व अन्य मेहनतकश लोग भी काफी ज्यादा दुःखी थे। इतना ही नहीं बल्कि कांग्रेस पार्टी के ही शासनकाल में बड़ी संख्या में गरीब मजदूर व बेरोजगार लोग दुःखी होकर अपनी रोटी- रोजी के लिए, अपने राज्यों से पलायन करके देश के बड़े-बड़े महानगरों में जाकर बस गये, जिनकी अब केन्द्र में वर्तमान भाजपा सरकार व राज्यों में भी भाजपा सहित अन्य विभिन्न दलों की सरकारों के चलते हुये कोरोना महामारी की वजह से काफी दुर्दशा देखने को मिल रही है।


इसके इलावा, पूरे देश में विशेषकर दलितों, आदिवासियोें व अन्य पिछडे़ वर्गों के लोगों के ऊपर हर स्तर पर हुई जुल्म-ज्यादती भी कांग्रेसी सरकार में काफी चरम-सीमा पर थी। इस मामले में कांग्रेस पार्टी की सरकार में इन्हें न्याय मिलना तो बहुत दूर की बात रही बल्कि इनकी ज्यादातर एफ.आई.आर. तक भी पुलिस थानों में नहीं लिखी जाती थी। ऐसे हालात में ही फिर इनके हितों में ‘‘ कांशीराम ’’कोे दिनांक 14 अप्रैल सन् 1984 को, बी.एस.पी का गठन करना पड़ा है।


कांग्रेस पार्टी की तरह ही, कुछ राज्यों में क्षेत्रीय पार्टियों के सत्ता में आने के बाद भी, खासकर कमजोर वर्गोें का ना तो कोई खास विकास व उत्थान आदि हुआ है और ना ही इनके ऊपर जुल्म-ज्यादती आदि होनी भी बन्द हुई है और इनका लगातार अभी भी हर स्तर पर काफी पतन व उत्पीड़न आदि हो रहा है। विशेषकर उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) की सरकार में तो दलित, आदिवासी व अन्य पिछड़े वर्गों के लोग जो इनकी पार्टी व सरकार के विरोधी होते थे तो वे स्थानीय चुनावों में अपना पर्चा तक भी आसानी से दाखिल नहीं कर पाते थे। उस दौरान् यूपी में हर मामले में व हर स्तर पर कानून-व्यवस्था के नाम पर गुण्डाराज चल रहा था, जिसके कारण फिर हमारी पार्टी को सपा सरकार से अलग होना पड़ा था। और ऐसा किये जाने पर फिर मुझे खुद भी इनके गुण्डों, बदमाशों व माफियाओं आदि का शिकार होना पड़ा था और इस मामले में दिनांक 2 जून सन् 1995 की घटना किसी से छिपी नहीं है जिससे, उस समय प्रदेश की जनता को मुक्ति दिलाने के लिए फिर हमें सरकार बनाने के लिए मजबूरी में बीजेपी व अन्य पार्टियों का भी साथ लेना पड़ा था। लेकिन अब केन्द्र व


अधिकांश राज्यों में बीजेपी के नेतृत्व में बनी सरकार भी, कांग्रेस पार्टी के ही पदचिन्हों पर काफी कुछ चलती हुई हमें नजर आ रही है जिसके कारण फिर हमारी पार्टी को खासकर यू.पी की जनता के हित में, दिनांक 2 जून सन 1995 की घटना को भी दिल के ऊपर पत्थर रखकर व इसको किनारे करते हुये, फिरसे 1993 की तरह यहाँ सपा के साथ मिलकर इस बार लोकसभा का आम चुनाव लड़ना पड़ा है। लेकिन इसे यू.पी की जनता ने सपा के शासनकाल की नीतियों व इनके कार्यकर्ताओं की कार्यशैली पर अपनी नाराजगी जताते हुये इस गठबंधन को दिल से स्वीकार नहीं किया, जिसके कारण फिर हमें चुनाव के बाद यू.पी की जनता के हित में जल्दी ही इस पार्टी से अलग होना भी पड़ा है। और अब वर्तमान में यू.पी में जो बीजेपी का राज चल रहा है उससे हर मामले में व हर स्तर पर वैसे सभी वर्गों व धर्मों के लोग काफी दुःखी हैं, लेकिन खासकर कानून- व्यवस्था के मामले में तो हमंे सपा व भाजपा के शासनकाल में कोई विशेष अन्तर नजर नहीं आता है। इस सरकार में भी जातिगत व राजनैतिक द्वेष की भावना से लोगों का काफी शोषण एवं उत्पीड़न आदि होना अभी भी बंद नहीं हुआ है।


पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले में खासकर दलितों, आदिवासियों, अति पिछड़े वर्गों, मुसलमानों व अपरकास्ट समाज में से, मुख्य तौर पर ब्राह्मण समाज का तो अब हर स्तर पर काफी ज्यादा शोषण एवं उत्पीड़न आदि किया जा रहा है। आयदिन महिलाओं का भी काफी ज्यादा उत्पीड़न हो रहा है। सरकार दुःखी व पीड़ितों को न्याय दिलाने के बजाय, उनके मामलों को ज्यादातर दबाने का ही प्रयास करती रही है। लेकिन उनके मीडिया में उजागर होने पर कार्रवाई के नाम पर ज्यादातर खानापूर्ति ही की जाती रही है, जिससे प्रदेश की जनता इनकी इस कार्यशैली व खराब कानून-व्यवस्था से लगातार काफी दुःखी व परेशान ही हमें नजर आ रही है। प्रदेश में चोरी, डकैती, लूटमार, हत्या, महिलाओं का उत्पीड़न आदि की घटनाये आम हो चुकी है, यूपी में इस समय 75 जिले है कोई दिन ऐसा नहीं होता है, जब इन सभी जिलों में कोई ना कोई गम्भीर घटना ना होती हो। अर्थात् हर जिले में रोजाना् कोई ना कोई घटना जरूर होती है। अब ऐसे में यूपी की जनता को मेरी यहां चार बार रही हकूमत याद आ रही है ऐसे वर्तमान हालात में यूपी की जनता चाहती है कि प्रदेश में जहां कहीं भी जुल्म-ज्यादती आदि की घटनाये होती है वहां उनकी बहन जी आये। लेकिन पीड़ितोें की मदद के लिए मेरा हर घटनास्थल पर जाना तो बहुत मुश्किल है, क्यांेकि मुझे अकेले उत्तर प्रदेश में ही नहीं बल्कि पूरे देश में भी पार्टी संगठन का कार्य देखने के साथ ही सभी राज्यों में भी मुझे खासकर कमजोर वर्गों के ऊपर आयदिन हो रही जुल्म-ज्यादती के मामलों में भी काफी पैनी नजर रखनी पड़ती है।


मायावती ने बताया कि ऐसी स्थिति में अब हमारी पार्टी ने खासकर उत्तर प्रदेश में भाजपा के वर्तमान में चल रहे जंगलराज से दुःखी व पीड़ित जनता के हितों में आवाज उठाने व उन्हें न्याय दिलाने के लिए तथा इस मामले में सरकार पर कुछ हद तक अंकुश लगाने के लिए भी यहाॅ उत्तर प्रदेश में बी.एस.पी के कुछ वरिष्ठ लोगों को उनके प्रत्येक समाज के हिसाब से आज अधिकृत किया गया है, जो पूरे यूपी में सम्बन्धित समाज के किसी भी व्यक्ति पर अन्याय व अत्याचार के अति-गम्भीर व अति-संवेदनशील मामलों में घटनास्थल पर पहुँचकर उसे न्याय दिलाने के लिए तथा कोरोना गाइडलाइन्स का भी पालन करते हुए अपनी जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी एवं निष्ठा से निभायेंगे। लेकिन अति-गम्भीर व अति -संवेदनशील मामलों को छोड़कर, बाकी छोटे मामलों में भी, वे टेलीफोन के जरिये, वहां के पुलिस व प्रशासन से बात करके, उनको न्याय दिलाने की पूरी-पूरी कोशिश करेंगे। और यह विशेष व्यवस्था हमारी पार्टी को मजबूरी में यहाॅ प्रदेश की कानून-व्यवस्था व अपराध-नियन्त्रण की स्थिति अति-खराब व दयनीय होने की वजह से व इससे दुःखी व पीड़ित लोगों को न्याय दिलाने के खास मकसद से करनी पड़ रही है। लेकिन इसके लिए यहाॅ हमारी पार्टी के अधिकृत किये गये लोग घटनास्थल पर कोई धरना-प्रर्दशन आदि नहीं करेंगे। कफर््यू के दौरान् वे घटनास्थल पर कतई भी नहीं जायंेगे। कफर््यू हटने के बाद पीड़ित परिवार से मिलकर व उनसे सही तथ्यों की जानकारी हासिल करके वहाॅ के सम्बन्धित अधिकारियों से मिलेंगे तथा इसकी मीडिया को भी सही जानकारी भी देंगे। न्याय नहीं दिये जाने पर फिर ये मामले विधानसभा सत्र के दौरान दोनों सदनों में भी उठाये जायेंगे।


बसपा अध्यक्ष ने कहा कि पार्टी में प्रत्येक समाज के हिसाब से जिम्मेवारी सौंपी गयी है वह इस प्रकार से है:- 1. दलित व आदिवासी समाज केे लिए श्री गयाचरण दिनकर (जिला बाँदा) पूर्व बी.एस.पी. विधायक को, 2. पिछड़े वर्गों के लिए श्री लालजी वर्मा (जिला अम्बेडकर नगर) को, वर्तमान मे बी.एस.पी. विधायक व विधानसभा मेें बी.एस.पी. विधायक दल के नेता को तथा 3. मुस्लिम समाज के लिए- लखनऊ मण्डल एवं पश्चिमी यूपी के चार मण्डलों में श्री शमसुद्दीन राईन को व प्रदेश के बाकी 13 मण्डलों में श्री मुनकाद अली को, जो वर्तमान में यूपी के बी.एस.पी. के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं इनको 4. तथा खासकर ब्राह्मण समाज व अन्य अपरकास्ट समाज के लिए- श्री सतीश चन्द्र मिश्र को, जो वर्तमान में बी.एस.पी के राज्यसभा सांसद व राष्ट्रीय महासचिव भी हैं, इनकों इस कार्य के लिए अधिकृत किया गया है। इसके साथ ही, जब ये लोग अलग-अलग से किसी भी अति-गंभीर व अति-संवेदनशील मामले में किसी जगह घटनास्थल पर जायेंगे तो वहाॅ बी.एस.पी के जिला अध्यक्ष व स्थानीय मुख्य सेक्टर प्रभारियों को भी साथ में लेकर जरूर जायेंगे।