पीएम-किसान स्कीम की वर्षगांठ , 29 फरवरी को चित्रकूट में प्रधानमंत्री की मौजूदगी में होगा आयोजन

 


नई दिल्ली।कृषि व कल्याण मंत्रालय प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना की पहली वर्षगांठ समारोह 29 फरवरी को चित्रकूट में आयोजित करने जा रहा है। इस समारोह में 10 हजार नए किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के गठन की योजना की शुरूआत भी की जाएगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस समाराह में उपस्थित होंगे।


 ज्ञात हो कि  पीएम-किसान स्कीम की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले वर्ष 24 फरवरी को गोरखपुर में की थी।


किसानों की आय वर्ष 2022 तक दोगुनी करने के लक्ष्य को सामने रखते हुए 7000 एफपीओ बनाने की सलाह एक रिपोर्ट ने मंत्रालय को दी थी। पिछले बजट में इसको बढ़ा कर 10000 कर दिया गया था।19 फरवरी को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इसके लिए 4496 करोड़ का खर्च करने की मंजूरी दे दी गयी थी। एफपीओ के गठन में सदस्यता केा ले कर पहाड़ी और उत्तर पूर्व राज्यों को छूट भी प्रदान की गयी है। एक रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल प्रदेश के नौ जिलों में कुल 53 एफपीओ है जिसमें 10107 शेयर होल्डर हैं।


 पीएम किसान स्कीम के एक साल पूरे होने के उपलक्ष में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने आज योजना की उपलब्धियां बताईं। इस अवसर पर स्कीम से संबंधित मोबाइल एप भी श्री तोमर ने लांच किया। इससे किसानों की इस स्कीम तक पहुंच सुगम हो सकेगी।


श्री तोमर ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था में कृषि का बड़ा महत्व है। कृषि और गांवों के विकास से ही देश का संपूर्ण विकास होगा तथा इनके समृद्ध होने से देश समृद्ध होगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने सभी राज्य सरकारों और किसानों का आव्हान करते हुए वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का सूत्र दिया है। इसके लिए केंद्र सरकार ने योजना बनाते हुए पर्याप्त धनराशि की व्यवस्था की है, साथ ही योजना के क्रियान्वयन की गति बढ़ाई गई और पारदर्शिता भी सुनिश्चित की गई है।


अब तक इस योजना के अंतर्गत देश के साढ़े आठ करोड़ किसानों को कवर किया गया है


श्री तोमर ने बताया कि पशुपालकों और मत्स्यपालकों के लिए भी किसान क्रेडिट कार्ड का लाभ पहुँचाने की व्यवस्था की गई है। 10 हजार नए एफपीओ बनाने का निर्णय लिया गया है, जिससे खेती के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन आएगा। हरेक एफपीओ को 15 लाख रू. तक की सहायता दी जाएगी। नाबार्ड और एनसीडीसी दोनों को मिलाकर 1500 करोड़ रू. फंड बनाया गया है।


 एक सवाल के जवाब में श्री तोमर ने बताया कि भू-जोत की जो कुछेक विसंगतियां हैं, उन्हें दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।


 


 


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