श्री श्री परमहंस योगानन्द की 125वीं जयन्ती पर भारत सरकार द्वारा संस्मरणात्मक सिक्के का विमोचन

नई दिल्ली,


वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज यहां श्री श्री परमहंस योगानन्द की 125वीं जयंती पर विशेष संस्मराणत्मक सिक्का जारी किया।इस अवसर पर बोलते हुए श्रीमती निर्मला सीतारमण ने कहा: “परमहंस योगानंद भारत के एक महान सपूत थे जिन्हें वैश्विक पहचान मिली। उनकी गहन भेदी और तेजोमय आंखें दिव्य शक्ति से भरी हैं।”


उन्होंने बताया कि यह अवसर उनके लिए गौरव के पल हैं, और आगे कहा, "परमहंसजी के सार्वभौमिक संदेश का महत्व इस बात में निहित है कि यह लोगों और राष्ट्रों के जीवन में सामंजस्य लाता है, और इसलिए भी कि वे अपने संदेश को उस समय व्यापक रूप से प्रचार कर सके जब दुनिया में संचार साधन बहुत सीमित थे।"


परमहंस योगानन्द द्वारा भारत में स्थापित योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिय और अमेरिका में स्थापित  सेल्फ-रियलाइजेशन फेलोशिपके वर्तमान अध्यक्ष स्वामी चिदानंद गिरि ने इस अवसर पर जो संदेश भेजा, उसे स्वामी विश्र्वानंद ने सुनाया:


“परमहंसजी ने पहले ही देख लिया था कि ईश्वर की चेतना के साथ एकरूपता के द्वारा,जो कि ध्यान में उनके साथ आंतरिक सम्पर्क से आती है, उनकीसंतानें भी एक दूसरे के साथ अपने संबंध को बेहतर ढंग से समझेंगी,और इस प्रकारसम्पूर्ण विश्व में अधिक सामंजस्य का युग लायेंगी।माननीय वित्त मंत्री द्वारा इस संस्मरणात्मक सिक्के को जारी करना सभी प्राणियों के ह्रदयों में दिव्य आत्मा (परमात्मा) का बोध करने के इस लक्ष्य की ओर मानवता की यात्रा में एक मील के पत्थर का समयोचित सम्मान है।”


पश्चिम में योग के जनक के रूप में विख्यात परमहंस योगानंद जी उस गुरु परंपरा से संबंध रखते हैं जिनका संदेश सार्वभौमिक है,जो देश व धर्म की सीमाओं से परे जा कर भारत की सर्व-समावेषक प्रकृति और हृदय को मूर्त रूप प्रदान करता है।


मानवता के प्रति परमहंस योगानंद जी की सबसे बड़ी सेवा वह मिशन है जो उन्हें भारत केप्राचीन पवित्र विज्ञान क्रियायोग का पूरे विश्व मेंप्रचार  करने के लिए दिया गया ताकि इसके श्रद्धापूर्वक अभ्यास सेविश्व भर में आध्यात्मिक रूप से भूखी आत्माएं ईश्वर के प्रत्यक्ष सानिध्य का अनुभव कर सकें।


          परमहंस योगानंद जी की कालजयी कृति 'ऑटोबायोग्राफी ऑफ ए योगी' का सभी भारतीय भाषाओं सहित विश्व की 52 भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। हाल ही में (19 अक्टूबर,2019 को) श्रीलंका की राजभाषा 'सिंहला'  (जो विश्व की 52वीं  भाषा बनी)में स्वामी चिदानंद गिरी ने इस पुस्तक का विमोचन किया। इसके साथ ही 'ऑटोबायोग्राफी ऑफ ए योगी' विश्व की 95% जनसंख्या को अपनी अपनी मातृभाषा में पढ़ने के लिए उपलब्ध है।


आजकल परमहंस योगानंद जी द्वारा स्थापित संस्थाओं 'योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया' और 'सैल्फ रियलाइजेशन फैलोशिप' के अध्यक्ष व आध्यात्मिक प्रमुख श्री श्री स्वामी चिदानंद गिरि भारत यात्रा पर हैं।


 


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