यमुना-गंगा में मूर्ति विसर्जन पारम्परिक तरीके से करें - हिन्दू संगठन

 


 


राजधानी दिल्ली के हिन्दू संगठनों गणपति पंडालों और दुर्गा पूजा समितियों ने अखिल भारत हिन्दू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री चन्द्रप्रकाश कौशिक जी के नेतृत्व में निर्णय लिया है कि गणपति पूजा और दशहरा के दौरान यमुना और गंगा मैय्या में दुर्गा मैय्या की मूर्तियों का विसर्जन पारम्परिक तरीके से होगा,इस मामले में किसी को हम अपने धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करने देंगे, हम संविधान द्वारा प्रदत्त मूलाधिकारों का हनन् करने वाले हर शख्श का न केवल विरोध करेंगे बल्कि ऐसी संविधान विरोधी ताकतों को मुंहतोड़ जवाब देकर भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों की रक्षा करेंगे।


हिन्दू महासभा भवन में आयेजित हिन्दू संगठनों की बैठक में दारा सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री मुकेश जैन ने कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 25 के अनुसार हमें अपने धर्म को अबाध रूप से मानने आचरण करने और प्रचार करने का मूलाधिकार मिला हुआ है। इसी के साथ मूलाधिकार अनुच्ठेद 26 हमें अपने धार्मिक कार्यों के प्रबन्धन स्वयं करने का मूलाधिकार धार्मिक संस्थाओं को देता है। साफ बात यह है कि यमुना में मूर्ति विर्सजन हमें कब करनी है कहां करनी है यह हमारा धार्मिक मामला है। जिसमें हस्तक्षेप करने का न तो प्रशासन को कोई अधिकार है और न ही कोई न्यायालय इस मामले में कोई नया नियम या आदेश जारी कर सकता,ओर आदेश भी ऐसा जो कि मूलाधिकारों का हनन् करे।


श्री जैन ने बताया कि दिनांक 9 नवम्बर,15 को हरित अधिकरण एन जी टी की प्रधान पीठ ने न्यायमूर्ति श्री स्वतन्त्रकुमार की अध्यक्षता में साफ आदेश दिया था कि हमने यमुना में मूर्ति विसर्जन पर प्रतिबंध लगाने का आदेश कभी नहीं दिया । जो कि अनेक समाचार पतों और टी वी चैनलों में भी दिखाया गया।


श्री जैन ने स्पष्ट किया कि जैसा कि आदेशकर्ता श्री स्वतन्त्र कुमार ने स्पष्ट किया कि दिनांक 13 जनवरी 2015 के उनके आदेश में यमुना में कही भी फूलमूर्ति विसर्जन पर रोक नहीं लगायी गयी बल्कि सिंचाई विभाग को यमुना किनारे स्पेशल घाट बनाने का आदेश है।


हिन्दू संगठनों ने दिल्ली और उत्तर प्रदेश सरकार को धन्यवाद दिया कि पिछले साल प्रशासन ने फूल-मूर्ति विसर्जन यमुना-गंगा में पारम्पारिक तरीके से करवाकर धार्मिक मान्यताओं का सम्मान किया। हिन्दू संगठनों ने गणपति पूजकों और दुर्गा माता के भक्तों से भी अपील की कि धार्मिक मान्यताओं और परम्पराओं का पालन करना उनका मूल अधिकार 25 और 26 है यदि कोई उनमें अडंगा डालता है, तो हिन्दू संगठन अपने धर्म की रक्षार्थ ऐसे धर्म शत्रुओं को मुंह तोड़ जवाब दें।


हिन्दू संगठनों ने पर्यावरण वन व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और उसके अधीनस्थ राष्ट्रीय हरित अधिकरण और यमुना निगरानी समिति को आगाह किया है कि वें अपनी हद में रहे और सी आई ए और फोर्ड फाउंडेशन के गैंग लीडर नक्सली आतंकवादी मनोज मिश्रा की उंगलियों पर नाचकर भारत सरकार की अर्थव्यवस्था को चैपट न करे। फूल मूर्ति विर्सजन रोकने के लिये लगाये बेरिकेट के कारण और मूर्ति विसर्जन को रोकने के लिये अस्थायी तालाब खुदवाकर सी आई ए के ऐजेन्ट सरकार के अरबो रुपयों को पलीता लगवा चुके हैं। इसी के साथ यमुना और गंगा की सफाई के नाम पर भी सरकार को खरबों रुपयों को पलीता लग चुका है और यमुना मैय्या और गंगा मैय्या के जल की स्थिति ज्यों कि त्यो बीस साल पहले जैसी ही है।


हिन्दू संगठनों ने स्पष्ट किया कि फूल का 5.5 पी एच यमुना के दिल्ली के 9 पी एच को स्वच्छ जल के पी एच 7 की और ले जाने में मदद करता हैं। हमारे द्वारा विर्सजित फूल मछलियों और यमुना मैय्या के वाहन कछुओं का पेट भरते हैं। जिसके बिना यमुना मैय्या को स्वच्छ करने वाले यें जलीय जीव भूखों मरकर यमुना मैय्या से गायब हो गये है। हिन्दू संगठनों ने स्पष्ट किया कि हमारे द्वारा विसर्जित मूर्तियों की रज गंगा सागर में जाकर हमें सुन्दरबन जैसा भू भाग बिना यु़द्ध लड़े प्रदान करती है। ंजिसका क्षेत्रफल आज 1 लाख 80 हजार वर्ग किलोमीटर है ओर जो ाज भी लगातार बढ़ रहा है।


हिन्दू संगठनों ने साफ किया कि यमुना में फूल मूर्ति विसर्जन पर रोक लगाने का कोई भी कानून संसद और महामहिम राष्ट्रनति जी ने नहीं बनाया है। बिना संसद और महामहिम राष्ट्रपति जी की स्वीकृति के पर्यावरण मंत्रालय और हरित अधिकरण जिस प्रकार से यमुना मैय्या में फूल मूर्ति विसर्जन पर रोक लगाकर बाधित कर रहा है वह गुन्डागर्दी के अलावा कुछ नहीं है।हिन्दू संगठन ऐसे गुन्डों से एक जुट होकर निपटना जानते हैं। हिन्दू संगठनों ने गृहमंत्री श्री अमित शाह से अपील की कि वें मूलाधिकार अनुच्छेद 26 ख के तहत लिये हमारे फूल मूर्ति विर्सजन के धार्मिक आदेश की रक्षा के लिये दिल्ली पुलिस से हमें फोर्स दिलायें ताकि पर्यावरण मंत्रालय और एन जी टी के गुण्डों से हम भक्तों के धार्मिक अधिकारों की रक्षा हो सके। 


 


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